एकल पुरुष सरकारी कर्मचारियों को भी मिलेगी ‘चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल)

 



हरियाणा कैबिनेट ने हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2016 में संशोधन को दी मंजूरी

https://www.apnamistri.in/2021/11/Haryana sarkar karmchari holiday rule.html

एकल पुरुष सरकारी कर्मचारियों को भी मिलेगी ‘चाइल्ड केयर लीव‘ (सीसीएल)


*सीसीएल के लिए 18 साल से कम आयु की शर्त दिव्यांग बच्चों पर लागू नहीं होगी*


 


चंडीगढ़, 14 दिसंबर - मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी को भी दो साल की बाल देखभाल छुट्टी की अनुमति होगी।


          यह नियम हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) संशोधन नियम, 2022 कहे जाएंगे। ये नियम सरकारी गजट में इनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।


          संशोधन के अनुसार, एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी (अविवाहित, विधुर या तलाकशुदा) और महिला सरकारी कर्मचारी केवल 18 वर्ष की आयु तक के अपने दो बड़े जीवित बालकों की देखभाल के लिए संपूर्ण सेवाकाल के दौरान अधिकतम दो साल (यानी 730 दिन) की अवधि के लिए चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठा सकते हैं।


          हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2016 के नियम 46 में संशोधन कर भारत सरकार की तर्ज पर महिला सरकारी कर्मचारियों के अलावा एकल पुरूष सरकारी कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव की स्वीकृति दी गई है। नियम 46, उप-नियम (1) के स्थान पर निम्नलिखित उप-नियम - चाइल्ड केयर लीव केवल 18 वर्ष की आयु तक के अपने दो बड़े जीवित बालकों की देखभाल के लिए संपूर्ण सेवाकाल के दौरान अधिकतम दो साल (यानी 730 दिन) की अवधि के लिए स्वीकार्य होगा। परंतु इस 730 दिनों की अवधि में एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने से पूर्व किसी राज्य सरकार या भारत सरकार के अधीन काम करने के दौरान महिला सरकारी कर्मचारी द्वारा उन्हीं दो बड़े बालकों की माता के रूप में ली गई चाइल्ड केयर लीव, यदि कोई हो, शामिल है, प्रतिस्थापित किया जाएगा।

https://www.apnamistri.in/2022/11/Haryana department merger.html

          इसके अलावा, 18 वर्ष से कम आयु की शर्त दिव्यांग बालकों पर लागू नहीं होगी, यदि सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए अशक्तता प्रमाण पत्र के अनुसार अशक्तता 60 प्रतिशत से अधिक है और दिव्यांग बच्चा पूरी तरह से महिला या एकल पुरुष सरकारी कर्मचारी पर निर्भर है।


क्रमांक - 2022




 


हरियाणा उद्यम संवर्धन (संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप को मंजूरी


 


चंडीगढ़, 14 दिसंबर - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा उद्यम संवर्धन अधिनियम, 2016 में आगे संशोधन करने के लिए हरियाणा उद्यम संवर्धन (संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप को स्वीकृति दी गई।


          हरियाणा उद्यम संवर्धन अधिनियम, 2016 की धारा 3 (3) (द्ब1) में प्रस्तावित संशोधन किया गया है कि उच्चाधिकार प्राप्त कार्यकारी समिति राजकोषीय प्रोत्साहनों के पैकेज से हट कर सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किसी भी क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए कोई अन्य नीति के तहत मेगा परियोजनाओं और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं में किसी भी प्रकार के प्रोत्साहन, रियायत, छूट या अनुदान देने की सिफारिशों को अनुमोदित कर सकें।


क्रमांक- 2022


 




 


मंत्रिमंडल ने हरियाणा चौकीदारा (चौकीदार) नियम, 2013 में संशोधन को दी मंजूरी


संशोधन के बाद ग्रामीण चौकीदार ईपीएफ लाभ के पात्र होंगे


 


चंडीगढ़, 14 दिसंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा चौकीदारा (चौकीदार) नियम, 2013 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की, जिसमें उपायुक्त द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकरण का प्रावधान करना और ग्रामीण चौकीदारों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाभ देना है।

https://www.apnamistri.in/2020/11/electric-control-panel-working-capacity.html

ये नियमों हरियाणा चौकीदारा (चौकीदार) संशोधन नियम, 2022 कहलाए जाएंगे।


हरियाणा चौकीदारा (चौकीदार) नियम, 2013 (इसके बाद उक्त नियम कहा जाता है) में, नियम 7 के बाद, निम्नलिखित नियम डाला जाएगा, अर्थात, ‘7(ए)’ उपायुक्त के आदेश के खिलाफ अपील - पारित आदेश से व्यथित व्यक्ति उपायुक्त द्वारा नियम 7 के अधीन ऐसे आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर आयुक्त को अपील कर सकता है। आयुक्त अपील की सुनवाई के बाद आदेश की पुष्टि, परिवर्तन या पलट सकता है। आयुक्त का निर्णय अंतिम होगा।


इसके अलावा, उक्त नियमों में, नियम 12 में, उप-नियम (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-नियम को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात, ‘प्रत्येक ग्राम चौकीदार को सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित और अधिसूचित मानदेय प्रति माह प्राप्त होगा और वह कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (1952 का केंद्रीय अधिनियम 19) के प्रावधानों द्वारा शासित नियमों के लाभ को पात्र होगा।’


क्रमांक- 2022



 






चंडीगढ़, 14 दिसंबर - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 में और संशोधन करने के लिए हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप को स्वीकृति दी गई।


हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 (इसके बाद मूल अधिनियम) की धारा 51 की उप-धारा (3) के बाद, उप-धारा अर्थात् ‘‘(3ए) जोड़ा जाएगा।


          निदेशक या उपायुक्त, जैसा भी मामला हो, उप-धारा (3) के तहत मूल्यांकन करेगा कि  हटाए गए व्यक्ति से उसकी लापरवाही या कदाचार के परिणामस्वरूप ग्राम निधि या संपत्ति के नुकसान, बर्बादी या दुरुपयोग के कारण देय राशि, यदि कोई हो, और उपायुक्त नुकसान की राशि की वसूली करेगा। आदेश की तिथि से तीन माह की अवधि के भीतर एवं यदि उक्त अवधि में राशि की वसूली नहीं की जाती है तो उसे भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूल किया जायेगा। अधिनियम 51 के अंतर्गत अपील के विरूद्घ पारित किए गए किसी भी आदेश को राज्य सरकार की बजाय अब मंडलायुक्त देखेंगे।


          आगे, मूल अधिनियम की धारा 53 में, उप-धारा (2) में, ‘‘खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी’’ शब्दों के स्थान पर, ‘‘उप-मंडल अधिकारी (नागरिक)’’ शब्दों को प्रतिस्थापित किया जाएगा। आवश्यक वसूली के लिए ‘‘अंत में होने वाले शब्द को हटा दिया  जाएगा और उप-धारा (4) के बाद, उप-धारा अर्थात्, (4 क) में उपायुक्त एक अवधि के भीतर जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी द्वारा निर्धारित नुकसान की राशि की वसूली करेगा। आदेश की तिथि से तीन माह के भीतर और यदि उक्त अवधि के भीतर राशि की वसूली नहीं की जाती है, तो भू-राजस्व के बकाये के रूप में राशि वसूल की जाएगी, इस शब्द को सम्मिलित किया जायेगा।


क्रमांक - 2022




https://www.apnamistri.in/2020/11/what-is-tan-delta-test-its-use-full_3.html

 


राज्य मंत्रिमंडल ने हरियाणा ग्रामीण विकास (संशोधन) अधिनियम, 2022 प्रारंभ करने को दी मंजूरी


अब राज्य सरकार 1 अक्तूबर, 2022 से सभी कृषि उत्पादों पर हरियाणा ग्रामीण विकास शुल्क लगा सकेगी


चंडीगढ़, 14 दिसंबर - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम, 1986 की धारा 5(1) में संशोधन करने के लिए हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम (संशोधन) 2022 के प्रारूप को मंजूरी दी गई।


          अधिनियम अब हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम (संशोधन) 2022 कहलाएगा और यह 1 अक्तूबर, 2022 से प्रभावी होगा। राज्य सरकार 1 अक्तूबर, 2022 से सभी किस्मों के धान सहित अन्य सभी कृषि उत्पादों पर निर्धारित दर से हरियाणा ग्रामीण विकास शुल्क लगा सकेगी।


          हालांकि, प्रसंस्करण के लिए लाए गए कृषि उत्पाद के मामले में कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। कोई भी लेन-देन जिसमें खरीदी या बेची गई कृषि उपज की डिलीवरी वास्तव में नहीं की जाती है और डीलर पर केवल उस लेनदेन के संबंध में शुल्क लगाया जाएगा जिसमें वास्तव में डिलीवरी की जाती है।

          अब राज्य सरकार ने सभी किस्मों के धान पर हरियाणा ग्रामीण विकास शुल्क निर्धारित करने का भी निर्णय लिया है। यदि धान को 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत पर बेचा जाता है तो 50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से और यदि एक मुश्त आधार पर 2500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की कीमत पर बेचा जाता है तो बिक्री आय का 2 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा। संशोधन के उपरांत हरियाणा विधानसभा में हरियाणा ग्रामीण विकास अधिनियम पारित होने के उपरांत पहली अक्तूबर, 2022 से क्रियान्वित किया जा सकता है।


क्रमांक – 2022





चंडीगढ़, 14 दिसंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी क्षेत्रों में ‘कोर एरिया’ (मुख्य क्षेत्र) की परिभाषा सम्मिलित करने के लिए हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 में आगे संशोधन करने के लिए हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में संशोधन करने के लिए हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई।


          बिल ‘कोर एरिया’ को परिभाषित करता है,  जिसका अर्थ है इस संशोधन अधिनियम के लागू होने से पचास साल पहले नियोजित या विकसित नगरपालिका सीमा के भीतर निर्मित क्षेत्र और जो शहरीकरण और समय की कमी के कारण भूमि उपयोग की पुनर्योजना की आवश्यकता होती है और जिसमें बाद में नगरपालिका सीमा में शामिल गांव आबादी का क्षेत्र निर्मित क्षेत्र भी शामिल है।


          आगे यह भी प्रस्तावित है कि ‘कोर एरिया’ में मिश्रित भूमि के उपयोग की अनुमति भी होगी। बशर्ते कि योजना नियमों एवं ऐसे शुल्कों में वसूली के पश्चात जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित भूमि उपयोगों को दर्शाने और भविष्य में किसी भी जटिलता से बचने के लिए अधिनियम में ‘कोर एरिया’ को परिभाषित करना आवश्यक है। चूंकि, ये मुख्य क्षेत्र नगरपालिका सीमा के भीतर स्थित हैं। इसलिए, हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में आवश्यक संशोधन कोर क्षेत्र की परिभाषा सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता थी।


क्रमांक - 2022





मंत्रिमंडल की बैठक में विभागों के विलय के प्रस्ताव को मिली मंजूरी


 


चंडीगढ़, 14 दिसंबर - हरियाणा में विभिन्न विभागों के कामकाज में बेहतर तालमेल लाने और कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए उद्देश्य से एक ही प्रकार की कार्य प्रकृति वाले कुछ विभागों का विलय एवं पुनर्गठन करने का निर्णय लिया है।


निदेशालय, यूटिलिटीज और प्राधिकरण पहले की तरह काम करते रहेंगे। वरिष्ठता के कानूनी मुद्दों से बचने के लिए वर्तमान में किसी भी कर्मचारी काडर का विलय नहीं किया जाएगा।


इस आशय के एक प्रस्ताव को आज यहां मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। 


निर्णय के अनुसार, अब नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभा को विद्युत विभाग के साथ विलय किया गया है और विभाग का नाम बदलकर ऊर्जा विभाग किया गया है।


सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय विभाग


अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का विलय करने के बाद इनका नाम इनका बदलकर सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय विभाग किया गया है।


उच्चत्तर शिक्षा विभाग


उच्चतर शिक्षा विभाग तथा तकनीकी शिक्षा विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का विलय एक सिंगल विभाग में किया गया है। इस विभाग का नाम उच्चत्तर शिक्षा विभाग किया गया है।


हैरिटेज और पर्यटन विभाग


पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का पर्यटन विभाग में विलय किया गया है। इस विभाग का नाम बदलकर हैरिटेज और पर्यटन विभाग किया गया है।


पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग


वन एवं वन्य जीव विभाग तथा पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का विलय कर इसका बदलकर पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग किया गया है।


सूचना, जनसम्पर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग


कला एवं संस्कृति विभाग का विलय सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग के साथ किया गया है और इसका नाम बदलकर सूचना, जनसम्पर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग किया गया है।


युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमशीलता विभाग


खेल विभाग से केवल युवा मामलों के घटक को निकाल कर कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग और रोजगार विभाग के साथ विलय किया गया है। विलय करने के बाद विभाग का नाम युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमशीलता विभाग किया गया है। नया विभाग कौशल, प्रशिक्षण व कौशल शिक्षा सहित युवा मामलों को व्यापक रूप से देखेगा।


उद्योग एवं वाणिज्य विभाग


आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक और आईटी उद्योग सभी प्रकार की औद्योगिक गतिविधियों से मजबूती से जुड़ा हुआ है। इसलिए, राज्य सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को भंग करने और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा निजी आईटी को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के दायरे में लाने का फैसला किया है।


इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वर्तमान कार्यों को विभिन्न मौजूदा विभागों को आवंटित किया गया है। इसके तहत, आईटी उद्योग से संबंधित कार्य/विषयों को उद्योग विभाग को पुनः आवंटित किया गया है। ई-गवर्नेंस से जुड़े कार्य/विषयों और परियोजनाओं/शासन में आईटी के उपयोग को नागरिक संसाधन सूचना विभाग को फिर से आवंटित किया जाना जाएगा। हारट्रोन एक इकाई के रूप में रहेगा और उद्योग विभाग को आवंटित किया जाना चाहिए।


सामान्य प्रशासन विभाग


निगरानी एवं समन्वय विभाग और प्रशासनिक सुधार विभाग को एक मौजूदा विभाग जोकि सामान्य प्रशासन विभाग है, में विलय कर दिया गया है।


हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा लोक सेवा आयोग, सीईटी के संबंध में नीतियां, जो पहले मानव संसाधन विभाग को हस्तांतरित किए गए थे, उन्हें वापस ले लिया जाएगा और सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दिया जाएगा।


इसके अलावा, आपूर्ति एवं निपटान निदेशालय को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग से वित्त विभाग में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।


राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग


चकबंदी विभाग तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का विलय कर दिया गया है और इसका नाम बदलकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग किया गया है। इसके अलावा, फायर सर्विस, फायर सेफ्टी निदेशालय को शहरी स्थानीय निकायों से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में स्थानांतरित किया जाएगा।

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