कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को हरी झंडी दी New Education policy 2022

 


 कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को हरी झंडी दे दी है। 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव आया है। नई शिक्षा नीति की उल्लेखनीय विशेषताएं इस प्रकार हैं:https://www.apnamistri.in/2020/12/what-is-ammeter-and-its-functionetc2020.html

 *5 साल मौलिक*

 1. नर्सरी @4 साल

 2. जूनियर केजी @5 साल

 3. सीनियर केजी @6 साल

 4. पहली कक्षा @7 वर्ष

 5. कक्षा 2 @ 8 वर्ष

 *3 साल की तैयारी*

 6. तीसरी कक्षा @9 वर्ष

 7. कक्षा 4 वीं @ 10 वर्ष

 8. कक्षा 5वीं @11 वर्ष

 *3 साल मध्य*

 9. छठी कक्षा @12 वर्ष

 10.7वीं @13 वर्ष

 11. कक्षा 8वीं @ 14 वर्ष

 *4 साल माध्यमिक*

 12. कक्षा 9वीं @ 15 वर्ष

 13.एसटीडी एसएससी @16 वर्ष

 14.Std FYJC @17Years

 15.एसटीडी एसवाईजेसी @18 वर्ष

 *विशेष और महत्वपूर्ण बातें*:

 *बोर्ड 12वीं में ही होगा, एमफिल बंद रहेगा, 4 साल की कॉलेज डिग्री*

 *10वीं का बोर्ड खत्म, एमफिल भी होगा बंद,*

 * अब 5वीं तक के छात्रों को मातृभाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्रभाषा में ही पढ़ाया जाएगा। बाकी विषय, भले ही वह अंग्रेजी हो, एक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।*

  *अब सिर्फ 12वीं की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। जबकि पहले 10वीं की बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य था, जो अब नहीं होगा।

 * परीक्षा 9वीं से 12वीं कक्षा तक सेमेस्टर में होगी। 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत स्कूली शिक्षा दी जाएगी।*

 वहीं, कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी। यानी ग्रेजुएशन के पहले साल का सर्टिफिकेट, दूसरे साल में डिप्लोमा, तीसरे साल में डिग्री।https://www.apnamistri.in/2022/01/IndianBroken family.html

 *3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जो उच्च शिक्षा नहीं लेना चाहते हैं। जबकि उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी। 4 साल की डिग्री करने वाले छात्र एक साल में एमए कर सकेंगे*।

 *अब छात्रों को एमफिल नहीं करना पड़ेगा। बल्कि एमए के छात्र अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे।

 *10वीं में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।*

 *छात्र इस बीच अन्य कोर्स कर सकेंगे। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2035 तक 50 प्रतिशत होगा। वहीं, नई शिक्षानीति के तहत यदि कोई छात्र किसी कोर्स के बीच में दूसरा कोर्स करना चाहता है तो वह दूसरा कोर्स कर सकता है। पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक।

 *उच्च शिक्षा में भी कई सुधार किए गए हैं। सुधारों में श्रेणीबद्ध शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वर्चुअल लैब विकसित की जाएगी। एक राष्ट्रीय शैक्षिक वैज्ञानिक मंच (एनईटीएफ) शुरू किया जाएगा। बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं।

 *सरकारी, निजी, डीम्ड सभी संस्थानों के लिए समान नियम होंगे।https://www.apnamistri.in/2022/01/PPP .html

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